Tum Haqiqat Nahi Ho Hasrat Ho – A Heartfelt Ghazal by Jaun Elia
Tum Haqiqat Nahi Ho Hasrat Ho | Ghazal by Jaun Elia
By Jaun Elia - Renowned Poet
ग़ज़ल
तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो
जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो
मैं तुम्हारे ही दम से ज़िंदा हूँ
मर ही जाऊँ जो तुम से फ़ुर्सत हो
तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू
और उतनी ही बे-मुरव्वत हो
तुम हो पहलू में पर क़रार नहीं
या'नी ऐसा है जैसे फ़ुर्क़त हो
तुम हो अंगड़ाई रंग-ओ-निकहत की
कैसे अंगड़ाई से शिकायत हो
किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ
तुम मिरी ज़िंदगी की आदत हो
किस लिए देखती हो आईना
तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
दास्ताँ ख़त्म होने वाली है
तुम मिरी आख़री मोहब्बत हो
A profound exploration of love, longing, and the depths of connection. Jaun Elia captures the essence of heartbreak and desire in this moving ghazal. |